Ek Chithda Sukh

Ek Chithda Sukh
तुमने कभी उसे देखा है ? किसे ? दुख को…मैंने भी नहीं देखा, लेकिन जब तुम्हारी कज़िन यहाँ आती है, मैं उसे छिप कर देखती हूँ। वह यहाँ आकर अकेली बैठ जाती है। पता नहीं, क्या सोचती है और तब मुझे लगता है, शायद यह दुख है। निर्मल वर्मा ने इस उपन्यास में ‘दुख का मन’ परखना चाहा है – ऐसा दुख, जो ज़िन्दगी के चमत्कार और मृत्यु के रहस्य को उघाड़ता है…मध्यवर्गीय जीवन-स्थितियों के बीच उन्होंने बिट्टी, इरा,...More

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